ॐ जय गंगे माता : Ma Ganga Aarti
May 1, 2009 · By Govind




(8 votes, average: 3.5 out of 5)Aum Jai Gange Mata, Shri Jai Gange Mata, Ganga Maiya Ki Aarti
Related Videos
- Ganga Tera Pani Amrit Ganga Tera Pani Amrit Devotional Songs dedicated to Mother River Ganga. Har Har Gange...Namami Gange...
a must listen series:

3 Responses
adesh
May 27th, 2009 at 9:26 pm
1it’s truly devotional.
ganga snan se sare paap mit jaate hai. jai mata di
ramahe
July 6th, 2009 at 7:33 pm
2I just feel in INdia,even thougt i am in Colombia south america. I am colombian but i feel more indian . I have been 13 times in India
Himanshu Kumar Pant
November 16th, 2009 at 11:27 pm
3आप सभी सम्मानित सज्जनों को मेरा प्रणाम | आशा है आप कुशल होंगे | बहुत लम्बे समय से मन मैं एक विचार को दबाये हुए था | जाने कैसे आज अंतरात्मा ने जोर देकर कहा की अगर कर नहीं सकते हो तो कह तो सकते हो | अगर तुम्हारे विचार मैं सच्चाई होगी तो कोई न कोई तुम्हारा साथ जरूर देगा |
मैं ग्राम पन्तगाँव जिला अल्मोड़ा का निवासी हूँ | स्वाभाव से सरल एवं व्यवसाय से इंजिनियर हूँ | अभी-अभी इंजीनियरिंग की पढाई पूरी की है | दुनिया बहुत तो नहीं देखी है परन्तु थोडा बहुत अनुभव हो गया है | आज मैं जो भी हूँ जैसा भी हूँ उसमे मेरे माता पिता, पड़ोस, गाँव व क्षेत्र के सभी लोगों का सहयोग रहा है | स्कूल के लिए जिस रास्ते पर चला उसे कभी मैंने नहीं बनाया | जिन पेडो के फल खाए वो मैंने नहीं लगाये थे | जिस गाय या भेंस का दूध पिया उन्हें कभी पाला भी नहीं | जिस पेड़ की लकडियों की आंच से मैंने अपने पेट की भूख को मिटाया होगा कभी उन्हें सींचा तक नहीं | अब जब मैं इस योग्य हो गया हूँ की उन सभी का कर्ज अदा कर सकूँ तो मुझे गाँव छोड़ना पड़ा | क्योंकि गाँव रहकर कंप्यूटर इंजीनियरिंग का कोई कम नहीं हो सकता या यह कहा जा सकता है वहां पर उतनी दक्षता से कार्य नहीं हो सकता |
मेरे गाँव के लोग बहुत सीधे हैं | उनकी कोई अपेक्षा भी नहीं है | पर वो इतने समृद्ध नहीं हैं कि अपनी छोटी छोटी इच्छाओं को पूरी कर पायें | या तो तन या साथ या धन कि कमी सदैव उनके इच्छाओं मैं बाधा पहुंचाती है | एक इच्छा जिसे मैं पूरी करना चाहता हूँ , वो है गंगा स्नान | मेरे गाँव के वृद्ध, असहाय, गरीब लोग जब कभी भी किसी ईश्वरीय कार्य को पूर्ण करके आते हैं तो उनके अन्दर का खालीपन मुझे अन्दर तक झकझोर देता है | उन्होंने सुना है कि गंगा स्नान से पाप धुल जाते हैं, कई के पूर्वजों का कल्याण हो जाता है | परन्तु वो जाएँ भी तो कैसे ?
जाने कितने सालों से मैं ये सोचता आया हूँ कि उन सभी अक्षम लोगो को गंगा स्नान कराऊंगा | पर इस बार के कुम्भ ने मुझे बहुत बल दिया है | क्योंकि यह मौका अब १२ साल बाद ही आएगा और मैं इसे चूकना नहीं चाहता | मेरे पास इस कार्य के लिए केवल धन की कमी है | जो आप सभी की सहायता से पूरी हो जाएगी |
महोदय यदि इस शुभ कार्य मैं आप मेरी किसी भी तरह की मदद कर सकते हैं तो मैं आपका आभारी रहूँगा | मैं केवल धन की सहायता नहीं मांग रहा हूँ | आप मुझे किसी ऐसी संस्था का नाम /पता बता दीजियेगा जो इस कार्य मैं मरी मदद कर सकती है | या कोई ऐसा सुझाव जो इस यात्रा को पूर्ण करने मैं मदद कर सके | मैं गंगा को अपने घर गाँव ले जाने मैं सक्षम तो नहीं हूँ पर गाँव के लोगों को गंगा तक ला सकता हूँ |
वर्त्तमान में मैं कुल १००८ लोगों को कुम्भ स्नान करवाना चाहता हूँ, जिसमें ३०० महिलाएं व २०० पुरुष जो शारीरिक रूप से अक्षम हों (बहुत वृद्ध, अपंग) | २०० महिलाएं व २०० पुरुष जो शारीरिक रूप से सक्षम हों पर आर्थिक रूप से कमजोर हैं | १०८(पुरुष या स्त्री ) वो लोग जो शारीरिक रूप से पूर्ण समर्थ हों (जिनके पास या तो साथ या धन की कमी हो और गंगा स्नान की इच्छा रखते हों ) और इस कार्य मैं अपनी सेवा देना चाहते हों |
यदि आप इस यात्रा मैं किसी भी प्रकार से सहयोग देना चाह रहे हैं तो कृपया मुझे itspant [at] gmail.com. पर संपर्क कीजियेगा | खर्चे का पूर्ण विवरण आपको भेज दिया जायेगा |
आपके अनमोल समय के लिए आपका बहुत बहुत धन्यबाद
हिमांशु कुमार पन्त
ग्राम पन्तगाँव पोस्ट ऑफिस पन्तगाँव
वाया चौनालिया जिला अल्मोड़ा
उत्तराखंड (भारत)
RSS feed for comments on this post
Share your comments