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ॐ जय गंगे माता : Ma Ganga Aarti

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Aum Jai Gange Mata, Shri Jai Gange Mata, Ganga Maiya Ki Aarti

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3 Responses

  1. adesh

    May 27th, 2009 at 9:26 pm

    1

    it’s truly devotional.
    ganga snan se sare paap mit jaate hai. jai mata di

  2. ramahe

    July 6th, 2009 at 7:33 pm

    2

    I just feel in INdia,even thougt i am in Colombia south america. I am colombian but i feel more indian . I have been 13 times in India

  3. Himanshu Kumar Pant

    November 16th, 2009 at 11:27 pm

    3

    आप सभी सम्मानित सज्जनों को मेरा प्रणाम | आशा है आप कुशल होंगे | बहुत लम्बे समय से मन मैं एक विचार को दबाये हुए था | जाने कैसे आज अंतरात्मा ने जोर देकर कहा की अगर कर नहीं सकते हो तो कह तो सकते हो | अगर तुम्हारे विचार मैं सच्चाई होगी तो कोई न कोई तुम्हारा साथ जरूर देगा |
    मैं ग्राम पन्तगाँव जिला अल्मोड़ा का निवासी हूँ | स्वाभाव से सरल एवं व्यवसाय से इंजिनियर हूँ | अभी-अभी इंजीनियरिंग की पढाई पूरी की है | दुनिया बहुत तो नहीं देखी है परन्तु थोडा बहुत अनुभव हो गया है | आज मैं जो भी हूँ जैसा भी हूँ उसमे मेरे माता पिता, पड़ोस, गाँव व क्षेत्र के सभी लोगों का सहयोग रहा है | स्कूल के लिए जिस रास्ते पर चला उसे कभी मैंने नहीं बनाया | जिन पेडो के फल खाए वो मैंने नहीं लगाये थे | जिस गाय या भेंस का दूध पिया उन्हें कभी पाला भी नहीं | जिस पेड़ की लकडियों की आंच से मैंने अपने पेट की भूख को मिटाया होगा कभी उन्हें सींचा तक नहीं | अब जब मैं इस योग्य हो गया हूँ की उन सभी का कर्ज अदा कर सकूँ तो मुझे गाँव छोड़ना पड़ा | क्योंकि गाँव रहकर कंप्यूटर इंजीनियरिंग का कोई कम नहीं हो सकता या यह कहा जा सकता है वहां पर उतनी दक्षता से कार्य नहीं हो सकता |
    मेरे गाँव के लोग बहुत सीधे हैं | उनकी कोई अपेक्षा भी नहीं है | पर वो इतने समृद्ध नहीं हैं कि अपनी छोटी छोटी इच्छाओं को पूरी कर पायें | या तो तन या साथ या धन कि कमी सदैव उनके इच्छाओं मैं बाधा पहुंचाती है | एक इच्छा जिसे मैं पूरी करना चाहता हूँ , वो है गंगा स्नान | मेरे गाँव के वृद्ध, असहाय, गरीब लोग जब कभी भी किसी ईश्वरीय कार्य को पूर्ण करके आते हैं तो उनके अन्दर का खालीपन मुझे अन्दर तक झकझोर देता है | उन्होंने सुना है कि गंगा स्नान से पाप धुल जाते हैं, कई के पूर्वजों का कल्याण हो जाता है | परन्तु वो जाएँ भी तो कैसे ?

    जाने कितने सालों से मैं ये सोचता आया हूँ कि उन सभी अक्षम लोगो को गंगा स्नान कराऊंगा | पर इस बार के कुम्भ ने मुझे बहुत बल दिया है | क्योंकि यह मौका अब १२ साल बाद ही आएगा और मैं इसे चूकना नहीं चाहता | मेरे पास इस कार्य के लिए केवल धन की कमी है | जो आप सभी की सहायता से पूरी हो जाएगी |

    महोदय यदि इस शुभ कार्य मैं आप मेरी किसी भी तरह की मदद कर सकते हैं तो मैं आपका आभारी रहूँगा | मैं केवल धन की सहायता नहीं मांग रहा हूँ | आप मुझे किसी ऐसी संस्था का नाम /पता बता दीजियेगा जो इस कार्य मैं मरी मदद कर सकती है | या कोई ऐसा सुझाव जो इस यात्रा को पूर्ण करने मैं मदद कर सके | मैं गंगा को अपने घर गाँव ले जाने मैं सक्षम तो नहीं हूँ पर गाँव के लोगों को गंगा तक ला सकता हूँ |

    वर्त्तमान में मैं कुल १००८ लोगों को कुम्भ स्नान करवाना चाहता हूँ, जिसमें ३०० महिलाएं व २०० पुरुष जो शारीरिक रूप से अक्षम हों (बहुत वृद्ध, अपंग) | २०० महिलाएं व २०० पुरुष जो शारीरिक रूप से सक्षम हों पर आर्थिक रूप से कमजोर हैं | १०८(पुरुष या स्त्री ) वो लोग जो शारीरिक रूप से पूर्ण समर्थ हों (जिनके पास या तो साथ या धन की कमी हो और गंगा स्नान की इच्छा रखते हों ) और इस कार्य मैं अपनी सेवा देना चाहते हों |

    यदि आप इस यात्रा मैं किसी भी प्रकार से सहयोग देना चाह रहे हैं तो कृपया मुझे itspant [at] gmail.com. पर संपर्क कीजियेगा | खर्चे का पूर्ण विवरण आपको भेज दिया जायेगा |

    आपके अनमोल समय के लिए आपका बहुत बहुत धन्यबाद

    हिमांशु कुमार पन्त
    ग्राम पन्तगाँव पोस्ट ऑफिस पन्तगाँव
    वाया चौनालिया जिला अल्मोड़ा
    उत्तराखंड (भारत)


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