उत्तराखंड के 734 गांवों में पलायन की मार, पौड़ी में सबसे अधिक लोगों ने छोड़ा घर

उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं के पर्वतीय जिलों में पलायन की गहरी चोट दिखती है। पलायन के पीछे कोई एक वजह नहीं है। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य की सुविधाओं का अकाल पलायन की वजह मानी जाती है। पलायन की वजह से जो गांव-घर उजाड़ हो गए हैं, जिसके साथ ही वहां की संस्कृति और परंपरा भी विलुप्त हो रही है। 2017 में पलायन के कारणों और इसकी रोकथाम के लिए सुझाव देने के लिए ग्राम्य विकास विभाग के अंतर्गत पलायन आयोग का गठन किया गया था। आयोग ने दस पर्वतीय जिलों की में पलायन की रिपोर्ट सरकार को सौंप चुका है। रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड के 734 गांवों में पलायन हुआ है और करीब 4000 से अधिक गांव खाली होनै की कगार पर है। ऐसे में राज्य में नवगठित सरकार कै सामने उत्तराखंड के वीरान हो चुके गांवों को दुबारा बसाना एक बड़ी चुनौती है।

उत्तराखंड के 734 गांवों में पलायन

उत्तराखंड में पलायन रोकथाम के लिए सरकार भले ही कई घोषणाएं करती हो लेकिन जमीनी स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। वीआईपी की श्रेणी में माने जाने वाले जनपद पौड़ी गढ़वाल में पलायन की सर्वाधिक मार पड़ी है। पौड़ी गढ़वाल में 186 गांव निर्जन हो चुके हैं। वही बागेश्वर 77, पिथौरागढ़ 75, उत्तरकाशी 70, चंपावत 64, टिहरी 58, अल्मोड़ा 57, चमोली 41, हरिद्वार 38, नैनीताल 22, रुद्रप्रयाग 20, उधमसिंह नगर 19 तथा देहरादून के 7 गांव निर्जन हो चुके हैं। इससे ज्यादा भयावह खबर यह है कि राज्य के 4000 से अधिक गांव में 100 से भी कम लोग निवास कर रहे हैं और यह खाली होने की कगार पर है। वही 565 गांव ऐसे हैं जहां से 50 फीसदी से अधिक का पलायन हो चुका है।

यह भी पढ़ें- पौड़ी के दिवाकर गोदियाल का पार्लियामेंट में दमदार भाषण, बताया क्यों पलायन करता है उत्तराखंड का युवा

पलायन आयोग उपाध्यक्ष डा. एसएस नेगी का कहना है कि गांवों में पलायन रोकने के लिए गांव की आर्थिक व समाजिक स्थिति सुधारना सबसे महत्वपूर्ण है। गांवों में रह रहे लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए सरकार को प्रयास करना होगा। विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में एक ही तरह की योजनाएं और स्वरोजगार संभव नहीं है। परिस्थितियों के अनुरूप ही योजनाएं बनाई जानी चाहिए, साथ ही तीर्थाटन को पर्यटन और पर्यटन को ग्रामीण पर्यटन से जोड़ने के लिए ठोस रणनीति बनानी होगी। यहीं से पलायन की रोकथाम के लिए पहला सकारात्मक परिणाम आएगा।