उत्तराखंड की पांचवीं विधानसभा चुनाव की मतगणना समाप्त होने के साथ पांच साल में सत्ता परिवर्तन का मिथक भी टूट गया और बीजेपी ने बहुमत का आंकड़ा पार कर सरकार बनाने जा रही है, हांलांकि निर्वाचित मुख्यमंत्री के हारने और गंगोत्री सीट के जीतने का मिथक बरकरार रहा। रोचक जो देखने को मिला वो यह कि मुख्यमंत्री के तीनों उम्मीदवार अपनी सीट नहीं बचा पाए। सीएम धामी अपनी खटीमा सीट से हार गए, अब देखना यह होगा कि क्या भाजपा केन्द्रीय आलाकमान पुष्कर सिंह धामी तो मुख्यमंत्री बनाने का दांव खेलते हैं यह फिर प्रदेश को सीएम के रुप में नया चेहरा देखने को मिलेगा।

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उत्तराखंड के पांचवी विधानसभा चुनाव के लिए 14 फरवरी को मतदान हुआ था। अभी तक सभी विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता परिवर्तन होता आया था, ऐसे में कांग्रेस को एक उम्मीद यह भी थी कि इस बार सरकार बना लेंगे, लेकिन मोदी-योगी की लहर के सामने सारे मिथक ध्वस्त हो गए और बीजेपी ने 47 सीटों के साथ जीत दर्ज की। वहीं कांग्रेस के कई मुख्य चेहरों को हार का सामना करना पड़ा। वहीं तीसरे विकल्प का दांव भर रही आम आदमी पार्टी को कई सीटों पर नोटा से भी कम वोट मिले।

उत्तराखंड में भाजपा का प्रदर्शन

एक पृथक राज्य बनने के बाद उत्तराखंड में पहला विधानसभा चुनाव 2002 में हुआ था, जिसमें भाजपा को मात्र 19 सीटें मिली थीं, जिसके बाद 2007 में 35, 2012 में 31, 2017 में 57 और इस विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत का आंकड़ा पार कर 47 सीटें हासिल की।

तीन सीएम बदलने के बावजूद जनता ने जताया विश्वास

विधानसभा चुनाव 2017 में 57 सीटें जीतने के बाद सरकार में आई भाजपा ने 2022 विधानसभा चुनाव से पहली तीन-तीन सीएम बदल डाले। जिसे विपक्षी पार्टियों ने उत्तराखंड को भाजपा के लिए सीएम की प्रयोगशाला बताकर जनता का लुभाने की कोशिश की थी। एक समय यह लग भी रहा शायद भाजपा अपनी सरकार बचाने में नाकामयाब रहे, लेकिन उत्तराखंड की जनता ने मोदी-योगी पर विश्वास कर भाजपा के पक्ष में दोबारा जनादेश कर कुल 70 में से 47 सीटें थमा दीं। उत्तराखंड का जनता ने डबल इंजन पर विश्वास जताया, जिसके बलबूते पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक एवं भाजपा सरकार के 10 में से आठ मंत्री प्रतिष्ठा बचाने में सफल रहे।