Fect Check: इटली के डॉक्टरों का कोरोना से मरे व्यक्ति के शव के ऑटोप्सी के दावे वाला पोस्ट फर्जी है

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फेक्ट चेक: इटली के डॉक्टरों द्वारा कोरोना से मरे व्यक्ति के शव के ऑटोप्सी पोस्टमार्टम किया गया एक पोस्ट एक बार फिर सोसल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दरअसल ये पोस्ट फर्जी है जिसे एक ग़लत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।

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इस पोस्ट में यह भी लिखा है कि लोगों की मौत कोरोनावायरस से नहीं बल्कि ऐमप्लीफाईड ग्लोबल 5G इलैक्ट्रोमैगनेटिक रेडिएशन ज़हर की वजह से मर रहे हैं।

आइए आपको बताते हैं क्या है इस फर्जी वायरल ख़बर की सच्चाई

सच्चाई: यह दावा भ्रामक है कि कोविड—19 वायरस नहीं, बैक्टीरिया है। हमें पड़ताल में एक रिसर्च रिपोर्ट मिली। इसके अनुसार, कोरोनावायरस में रेस्पिरेटरी फेल्योर को मौत का मुख्य कारण माना जा रहा है। हालांकि, कई केसेज में ब्लड क्लॉटिंग भी सामने आई है और यह मौत के कारणों में से एक है, लेकिन इसे मुख्य कारण नहीं बताया गया है।

दूसरा झूठा दावा

इस वायरल मेसेज में दूसरा झूठा दावा किया गया है “इटली में यह ऑटोप्सी वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के कानून की अवज्ञा करते हुए किया गया है। डब्ल्यूएचओ कोरोना से मरने वालों के शवों की ऑटोप्सी की इजाजत नहीं देता, ताकि यह न पता चल जाए कि यह वायरस नहीं, बल्कि बैक्टीरिया है।”

सच्चाई: इस दावे की पड़ताल में हमने पाया कि WHO का ऐसा कोई कानून नहीं है, जिसमें कोरोना से मरने का शव परीक्षण करने से रोका जाता हो। हालांकि, डब्ल्यूएचओ की ओर से जारी गाइडलाइंस में यह जरूर बताया गया है कि कोविड19 से मरने वालों के शवों को किस तरह ट्रीट किया जाए, ताकि मृतकों को संभालने वालों को सुरक्षित किया जा सके और आगे संक्रमण फैलने से रोका जा सके। इसमें मृतक के शव को पैक करने का तरीका भी बताया गया है।