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title: "गोलू देवता (Golu Devta) - इतिहास, फोटो, मंदिर व चमत्कार"
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author: "Editorial Desk"
category: "उत्तराखंड"
published: "2024-08-20 21:10:29"
updated: "2026-07-18 12:44:44"
canonical: "https://www.hindulive.com/golu-devta/"
format: "article"
publisher: "HinduLIVE"
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# गोलू देवता (Golu Devta) - इतिहास, फोटो, मंदिर व चमत्कार

> गोलू देवता, घोड़ाखाल. अल्मोड़ा स्थित गोलू देवता (Golu Devta) मंदिर काफी प्रसिद्ध है। उन्हें स्थानीय बोली में गोल्ज्यू देवता भी कहते है, जो न्याय के देवता के रुप में कुमाऊं में प्रसिद्ध हैं। गोलू

**गोलू देवता, घोड़ाखाल. **अल्मोड़ा स्थित गोलू देवता (Golu Devta) मंदिर काफी प्रसिद्ध है। उन्हें स्थानीय बोली में गोल्ज्यू देवता भी कहते है, जो न्याय के देवता के रुप में कुमाऊं में प्रसिद्ध हैं। गोलू देवता का मंदिर उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के हवालबाग गाँव में है, यह मंदिर में लाखों घंटिया है और लाखों पर्चियां हैं। इतना ही नहीं यहां कुछ तो स्टैम्प पेपर भी है, जिनपर गोलू देवता से न्याय के लिए अर्जी लगाई गई है, श्रद्धालु यह पर्ची लिखकर मंदिर में रख देते है और जब उनको न्याय मिलता है, तब श्रद्धालु वहां पर घंटिया चढ़ाते हैं, इसलिए दोस्तों गोलू देवता (Golu Devta) के मंदिर में लाखों घंटिया हैं।

## गोलू देवता (Golu Devta) का इतिहास

गोलू देवता (Golu Devta Father) के पिता जालूराई थे, जालूराई चम्पावत के राजा थे, जालूराई की सात रानियां थी लेकिन सातों रानियों में से एक भी रानी को पुत्र नहीं था। राजा जालूराई की कोई संतान नहीं थी, राजा जालूराई चिंतित रहता था और उसने मन बना लिया तपस्या करने का, जबतक पुत्र प्राप्ति का वरदान नहीं मिलता, तब तक मे तपस्या करूँगा और वो गौर भैरव की तपस्या करने बैठ जाते है। उनकी तपस्या देखकर एक दिन गौर भैरव प्रसन्न होकर राजा जालूराई को एक वरदान मांगने को कहते हैं। "गौर भैरव कहते मांगो क्या चाहिए तुम्हें?" जालूराई एक पुत्र की कामना करते है, गौर भैरव उनको पुत्र-रत्न का वरदान देते और कहते है कि, तुम्हारे यहां में ही तुम्हारा पुत्र बनकर जन्म लूंगा, लेकिन तुम्हें आठवीं शादी करनी होगी।

राजा जालूराई इसे स्वीकार कर लेते हैं, लेकिन अभी वो आठवीं शादी को लेकर चिंतित रहते थे, एक दिन राजा जालूराई जंगल से लौट रहे थे, तभी एक तलाव के पास वो पानी पीने रुकते है, जैसे ही पानी पीने जाते है, तभी वहां एक स्त्री उनको रोकती है पानी पीने से। राजा बोलता है तुम मुझे पानी से कैसे रोक सकती हो? में यहाँ का राजा हूं। स्त्री कहती है आप राजा हो तो, वो सामने लड़ रहे दो सांड को शांत करो। राजा दोनो सांड को शांत करने जाता है, लेकिन सांड शांत नहीं होते और राजा वापस आ जाता है, तत्पश्चात वो स्त्री जाति है और सांड को शांत कर देती।

### राजा जालूराई की आठवीं रानी

राजा जालूराई यह देखकर प्रशन होते हैं और वो स्त्री से विवाह की बात करते है, तब वो स्त्री बताती है कि वो पंच देवता की बहन है कालिंका, आप मेरे भाइयों से बात करो और तभी वहां पर पंच देवता आते और इस तरह से राजा जालूराई और कालिंका का विवाह होता है और फीर कालिंका एक पुत्र को भी जन्म देती है, लेकिन दोस्तों जब पुत्र का जन्म हुआ तब राजा दूसरे देश में गए हुए थे और सिर्फ सात रानियां ही थी ओर वो सातों रानियां के मन में ईर्षा होती है जलन होती है।

### गोलू देवता के पिता की थी सात रानियां?

इसलिए वो सातों रानियां मिलकर उस बच्चे को एक बक्से में डालकर पानी में फेंक देती है और रानी के पास सिलबट्टे को रखदेती और कहती है कि आप ने कोई पुत्र को जन्म नहीं दिया है बल्कि आपने एक सिलबट्टे जन्म दिया है, और वहीं वो बच्चा एक मच्छवारे को मिलता है वो मच्छवारा वो बच्चे का भरण पोषण करता है, धीरे-धीरे वो बच्चा बड़ा होता है और उसको याद आता जाता है कि, उसका जन्म किस उद्देश्य के लिए हुआ है, किसका बेटा है, फिर वो अपने पिता से एक घोड़े की मांग करता है, लेकिन उसके पिता घोड़ा तो नहीं दिला सकते, लेकिन उसको एक लकड़े का घोड़ा लाकर देते हैं।

भैरव के अवतार थे, उनके पास शक्ति थी वो लकड़े के घोड़े को असली घोड़ा कर देते हैं और अपने महल की ओर जाते हैं, तभी वहां पर वो सातों रानियों को देखते हैं और उसको सबक सिखाने के लिए वो फिर से घोड़े को लकड़े का घोड़ा कर देते है और पानी पिलाने के लिए जाते है रानियां मजाक उड़ाती है।

एक लकड़े का घोड़ा कभी पानी पीता है? तभी गोलू देवता (Golu Devta) कहते है, अगर यहाँ पर रानी पत्थर को जन्म दे सकती है, तो लकड़ी का घोड़ा पानी भी पी सकता है और रानियां गुस्सा हो जाती है, वो राजा के पास लेकर जाती और कहती है कि इस बच्चे ना हमारा अपमान किया है।

### गोलू देवता के चमत्कार

गोलू देवता सारी कहानी कहते है, कैसे उसको पानी में डाल दिया था और एक पत्थर रख दिया था यह सुनकर राजा रानियों को सज़ा देता है और गोलू देवता को राजा घोसित करता है, फीर गोलू देवता के वहां से किसी को भी अन्यया नही होता, सबको न्याय मिलता था, इसलिए दोस्तों गोलू देवता को न्याय के देवता कहाँ जाता है और आज भी दोस्तों वहाँ के लोगों ने बहुत बार गोलू देवता को देखा है सफेद घोड़े में सफेद कपड़े में। और उत्तराखंड में गोलू देवता को सभी देवताओं में से बड़ा देवता भी माना जाता है।
