हिन्दू लाइव डेस्क, देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में करारी हार मिलने के बाद कांग्रेस के पूर्व सीएम हरीश रावत दो दिनो तक शांत थे। लेकिन सोशल मीडिया पर काफी आलोचना सहने के बाद उन्होंने आखिरकार चुप्पी तोडते हुए लिखा कि “पराजय के बाद सेनापति को हमेशा आलोचना सहनी पड़ती है। मैं भी एक स्वघोषित ही सही, सेनापति न सही लेकिन एक योद्धा तो हूं ही नं।” उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए लिखा कि इनके लोग मेरी आलोचना करते नही थक रहे हैं।

हरीश रावत ने लिखा कि कांग्रेस ने उत्तराखंड में नमाज की छुट्टी को लेकर कोई भी आदेश जारी नहीं किया था। उन्होंने प्रदेश में सरकार बनने पर मुस्लिम यूनिवर्सिटी खोलने की बात को भी नकार दिया। हालांकि हिन्दू लाइव की इस रिपोर्ट में उनकी पार्टी के उपाध्यक्ष ने प्रदेश में यूनिवर्सिटी खोलने की बात को स्वीकार किया था।

मखदूम अलाउद्दीन अली लाखों लोगों की आस्था का केंद्र

उन्होंने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि “धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ सूफीज्म एक बड़ी सोच रही है और मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर का स्थान उस सोच का एक बहुत बड़ा मुकाम है और लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है। मैं मानव मात्र की आस्था या सामूहिक आस्थाओं को सम्मान देना अपना राष्ट्रीय कर्तव्य मानता हूं।”