पिथौरागढ़ के मटियाल गांव को शहरों से लौटे दो युवकों ने किया आबाद

पलायन पहाड़ की त्रासदी है। लंबे वक्त से हम पलायन की मार झेल रहे हैं, पर अब उससे भी बड़ा खतरा हमारे गांवों पर मंडरा रहा है। रोजगार, शिक्षा समेत विभिन्न कारणों से पहाड़ के लोग शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। जिसकी वजह से कई गांव वीरान हो चुके हैं तो कुछ होने की कगार पर है। ऐसे ही वीरान हो चुके पिथौरागढ़ जनपद के मटियाल गांव को महानगरों के लौटे दो युवकों के प्रयास से गुलजार हो गया है और अब गांव में प्रवासी लौटने लगे हैं।

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पिथौरागढ़ जिले के गणाईगंगोली तहसील में स्थित जमतोला ग्राम पंचायत का राजस्व गांव मटियाल में करीब दो दशक पहले 20 परिवार रहते थे। बिजली, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पलायन करते रहे, वहीं पड़ोस के गांव कोटली तक सड़क बनी तो बचे लोग भी शिफ्ट हो गए। करीब 5 साल पूर्व गांव से आखरी परिवार भी पलायन कर गया, जिसके बाद यह गांव वीरान हो गया। यहां के मकान खंडहर होने लगे थे और खेत बंजर हो गए थे। गांव में एक भी व्यक्ति ना होने से इसे घोस्ट विलेज घोषित कर दिया।

लॉकडाउन में लौटे गांव

कोरोना काल में लाकडाउन की वजह से उत्तराखंड के काफी प्रवासी वापस गांव की ओर रुख किए। इसी दौरान पिथौरागढ़ के मटियाल गांव निवासी विक्रम सिंह और दिनेश सिंह मेहता गांव लौटे तो उन्होंने यहीं रहकर कुछ करने की ठानी। दिनेश सिंह पानीपत में चालक और विक्रम सिंह मुम्बई में रेस्टोरेंट में कार्य करते थे। जून 2020 में जब वह गांव लौटे तो कई लोगों ने उन्हें समझाने की कोशिश की और भूतिया गांव होने की बात कही, लेकिन दोनों युवकों ने गांव को पुनः बसाने की संकल्प के आगे किसी की नहीं सूनी।

पिथौरागढ़ के मटियाल गांव

कोविड लॉकडाउन के दौरान गांव लौटे दोनों युवाओं के सामने एक खाली गांव था। उत्तराखंड सरकार के रिवर्स पलायन के प्रयास को साकार करने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से 1.5 लाख का ऋण लिया और पशुपालन सब्जी उत्पादन तथा बागवानी शुरू किया। इसके बाद दोनों ने गाय, बैल और बकरियां खरीदीं और गांव में पशुपालन का काम शुरू कर दिया। विक्रम और दिनेश तरक्की को देखकर लोगों का भूतिया गांव का भ्रम टूटने लगा। जिसे देख अन्य परिवार भी अब घर वापसी की तैयारी कर रहे हैं।