उत्तराखंड में आयुर्वेदिक कॉलेजों के फ़ीस मामले पर कौन कर रहा है मनमानी

"उत्तराखंड के ये पर्वत कई सदियों से पूरी दुनिया को आयुर्वेद के लिए प्रेरित करते रहे हैं, सामान्य से सामान्य नागरिक भी जब इस धरती पर आता है तो उसे एक अलग तरह की दिव्य अनुभूति होती है."

ये शब्द भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हैं जो उन्होंने साल 2018 में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कहे थे.

इस बात को अभी बमुश्किल एक साल ही बीता है लेकिन आयुर्वेद के लिए पूरी दुनिया को प्रेरित करने वाले उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयुर्वेद के छात्र किसी तरह की दिव्य अनुभूति करवाने की जगह अपने ग़ुस्से और नाराज़गी से अवगत ज़रूर करवाते हैं.

देहरादून स्थित परेड ग्राउंड के बाहर एक टेंट के नीचे कुछ छात्र छोटी-बड़ी तख़्तियां थामें बैठे थे.

उत्तराखंड के निजी आयुर्वेदिक कॉलेजों के बीएएमस कोर्स के ये छात्र फ़ीस वृद्धि का विरोध जताने के लिए बीते दो महीने से अधिक समय से इसी टेंट के नीचे बैठे हैं. इन छात्रों का कहना है कि इनकी फ़ीस 80 हज़ार रुपये थी जिसे कॉलेज प्रशासन बढ़ाकर अब दो लाख 15 हज़ार कर रहे हैं. छात्रों का ये भी दावा है कि वो इस मामले को हाईकोर्ट तक ले गए जहां से उन्हें सफलता हाथ लगी है, फिर भी सरकार और प्रशासन उनकी सुनने को तैयार नहीं है.

हालांकि, दूसरी तरफ़ उत्तराखंड आयुर्वेद यूनिवर्सिटी से सम्बद्ध इन निजी कॉलेजों का कहना है कि उन्होंने सरकार के आदेश के आधार पर ही फ़ीस बढ़ाई है. वहीं सरकार भी कह रही है कि हाईकोर्ट के जो भी निर्देश हैं उनका पालन किया जाना चाहिए.

मंत्रियों की कॉलेजों में हिस्सेदारी?

इस बीच कई छात्र, अभिभावक दबी ज़ुबान में यह कहते हैं कि सरकार इन निजी कॉलेजों के ख़िलाफ़ इसलिए सख़्ती नहीं दिखा रही है क्योंकि उनके कुछ मंत्री और नेता ख़ुद कॉलेजों में हिस्सेदार हैं.

उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत (BBC Hindi) इस बात को खुलकर बताते हैं.

उनके अनुसार राज्य में आयुर्वेद के कुल 16 कॉलेज खोले गए लेकिन उनमें से सिर्फ़ तीन को ही सरकारी दर्जा दिया गया जबकि 13 प्राइवेट कॉलेज बना दिए गए.

जय सिंह रावत कहते हैं, “आख़िर क्या वजह है कि इतने अधिक प्राइवेट कॉलेजों को मान्यता दी गई. एक कॉलेज में प्रदेश के आयुष मंत्री हरक सिंह रावत के बेटे मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. दूसरे कॉलेज में देश के शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के परिवार के सदस्य जुड़े हैं, एक और कॉलेज योगगुरू रामदेव के पतंजलि योगपीठ की तरफ़ से चलाया जाता है. अब बताइए इन सभी कॉलेजों के ख़िलाफ़ सरकार कैसे सख़्ती दिखाएगी.”दून इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस के मैनेजिंग डायरेक्टर आयुष मंत्री हरक सिंह रावत के बेटे तुषित रावत हैं.

हमने फ़ीस वृद्धि से जुड़े मामले पर जब आयुष मंत्री हरक सिंह रावत से बात करनी चाही तो उन्होंने बताया कि वो प्रदेश में मौजूद नहीं हैं, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह निजी कॉलेजों का मामला है सरकार इसमें ज़्यादा कुछ नहीं कर सकती.

हालांकि गुरुवार (21 नवंबर) को जब प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसी मामले पर एक बैठक आयोजित की तो उसमें हरक सिंह रावत भी मौजूद रहे. इस बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा, “आयुष छात्रों के हितों का सरकार द्वारा पूरा ख्याल रखा जाएगा. माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का अनुश्रवण कर शीघ्र ही उच्च न्यायालय के न्यायधीश की अध्यक्षता में स्थाई शुल्क निर्धारण समिति गठित की जाएगी.”

credit © BBC hindi

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