चंपावत: जिला अस्पताल में नवजात को नहीं मिला इलाज़

राज्य गठन के बाद से ही उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाएं दुरुस्त करने के घोषणाएं होती रहती है लेकिन खासकर पर्वतीय जिलों में स्वास्थ्य सुविधाएं आज भी बदहाल स्थिति में है, जिसका खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ता है। ताजा मामला चंपावत जनपद का है जहां एक नवजात के इलाज के लिए दंपत्ति एक अस्पताल से दूसरे में भटकते रहे। काफी गिड़गिड़ाने के बाद जब जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने नवजात को देखा तो उन्हें न्यू बोर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट न होने के बात कहकर उसे रेफर कर दिया, जिसके बाद परिजन नवजात को लेकर वापस गांव लौट गए।

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जानकारी के अनुसार चंपावत जनपद के रायकोट महर निवासी गीता देवी पत्नी राजेश कुमार का शनिवार सुबह 6:00 बजे लोहाघाट उप जिला अस्पताल में प्रसव हुआ। नवजात का वजन औसत से कम होने की वजह से दो घंटे बाद जिला अस्पताल चंपावत में रेफर किया गया, लेकिन वहां कोई उनकी सुध लेने वाला नहीं था। गीता देवी के अनुसार अस्पताल में उन्हें इधर से उधर चक्कर लगवाए गए। कभी 40 नंबर तो कभी 41 नंबर कमरे में दिखाने को कहा गया। बाद में किसी तरह चिकित्सक ने देखा तो न्यू बोर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट न होने की बात कह कर हायर सेंटर हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाने को कहा।

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दंपति का कहना है कि उनके पास ना तो आयुष्मान कार्ड है और ना ही उनकी आर्थिक स्थिति भी ठीक है। ऐसे में हल्द्वानी ले जाकर इलाज का खर्च उठा पाना मुश्किल है। जिसकी वजह से बच्चे को वापस गांव ले जाना ही बेहतर समझा। पिता राजेश का कहना है कि शिशु मां का दूध नहीं पी रहा है जिससे कमजोरी हो रही है। ऐसे में दिक्कत कम ना होने पर लोहाघाट अस्पताल में दिखाएंगे। ‌