वंदे मातरम लिखकर अजर अमर हो गए बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय

बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय

हिन्दू लाइव डेस्क :- राष्ट्रीय गीत के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय जन्म 27 जून 1983 को पश्चिम बंगाल के परगना जिले के कांठलपाड़ा गांव में हुआ था. इनकी प्रारंभिक शिक्षा मेदिनीपुर मैं पूरी हुई. उसकेेेे बाद बंकिम चंद्र चटर्जीी ने मोगली के मोहसिन कॉलेज में अपनी पढ़ाई शुरू की. बंकिम चंद्र चटर्जी शुरुआत सेे ही आंगल भाषा से लगाव था, परंतु अंग्रेजी अध्यापक सेेेे डांट खाने के बाद उनकी अंग्रेजी से रुचि खत्म हो गई.

बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के बारे में कुछ बातें

बंकिमचंद्र चटर्जी पहले भारतीय थे, जिन्होंने बंगाल के प्रसिद्ध प्रेसीडेंसी कॉलेज से 1857 में बीए की डिग्री ली थी. पढ़ाई के प्रति इनके मन में बहुत रूचि थी. 1869 में इन्होंने अपनी कानून की डिग्री ले ली थी . अपनी शिक्षा समाप्ति के बाद वह डिप्टी मजिस्ट्रेट बने थे, और 9891 में इन्होंने सरकारी सेवा से रिटायरमेंट ले लिया था.

मात्र 11 साल की आयु में इनकी शादी हो गई थी, अपनी पत्नी के मृत्यु के बाद इन्होंने पुनर्विवाह किया था.

पढ़ाई में अच्छी पकड़ होने के कारण उन्हें बांग्ला और संस्कृत साहित्य में भरपूर ज्ञान था. 27 साल की उम्र में ही उन्होंने बांग्ला कृति दुर्गेश नंदिनी 1865 में प्रकाशित किया था. उसके बाद इन्होंने बंद दर्शन नामक पत्रिका 18 सो 72 में प्रकाशित करनी शुरू की जिसमें साहित्य सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दे उठाए जाते थे.

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1882 में इनके द्वारा आनंदमठ उपन्यास लिखा गया, जिसमें देशभक्ति की भावना की कहानी तथा अंग्रेजो के खिलाफ सन्यासियों के विद्रोह की घटना से प्रेरित है. वंदे मातरम गीत को भी इन्होंने आनंदमठ उपन्यास का मैं शामिल किया गया.

भारत का राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम 7 नवंबर 1876 को इनके द्वारा लिखा गया था. इस गीत में पहले 2 पद संस्कृत और बाकी बांग्ला भाषा में थे. 1896 में कोलकाता अधिवेशन में इस गीत को सर्वप्रथम गाया गया. आजादी के समय वंदे मातरम गीत राष्ट्रवाद का प्रतीक बन गया था. इनके निधन के बाद क्रांतिकारी बिपिन चंद्र पाल ने 1894 में वंदे मातरम नाम से राजनीतिक पत्रिका निकालने शुरू किया था.

राष्ट्रीय गीत के रचयिता बंकिमचंद्र

  • बंकिमचंद्र चटर्जी की कपालकुंडला, राजसिंह, कृष्णा कांत की वसीयतनामा, राधा रानी, इंदिरा आदि अन्य प्रमुख कृतियां है 1886 में इनका अंतिम उपन्यास सीताराम है.
  • देश को आजादी मिलने के बाद भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद भट्ट ने 24 जनवरी 1950 को वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत का दर्जा देने की घोषणा की.
  • भारत के इस महान साहित्य सेवी की मृत्यु 8 अप्रैल 1994 को हुई. इनके मृत्यु की खबर सुनकर पूरा भारत शोक में डूब गया.