इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय खेल स्टेडियम का नाम बदलकर तीलू रौतेली करने की उठ रही मांग

हिन्दू लाइव डेस्क – कल उत्तराखंड में धूमधाम से उत्तराखंड की लक्ष्मीबाई तीलू रौतेली की जयंती मनाई गई. वहीं सोशल मीडिया पर हल्द्वानी स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय खेल स्टेडियम का नाम तीलू रौतेली करने की मांग उठ रही है.

हल्द्वानी स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय खेल स्टेडियम

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हल्द्वानी स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय खेल स्टेडियम का उद्घाटन 18 दिसंबर 2016 को उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने किया था. इस स्टेडियम में विश्व स्तरीय सुविधाओं से उपयुक्त है. उत्तराखंड के हल्द्वानी नगर में स्थित यह स्टेडियम 70 एकड़ तक फैला हुआ है.

तीलू रौतेली का संक्षिप्त परिचय

उत्तराखण्ड पौड़ी गढ़वाल के चोन्दकोट परगना के गुराड गांव में जन्मी तीलू रौतेली
15 से 22 वर्ष की की आयु में 7 युद्ध लड़ने वाली विश्व की एक मात्र वीरांगना है. तीलू के पिता का नाम भूप सिंह रावत तीलू के दो भाई भगतु और पत्वा थे। तीलू की सगाई बाल्यकाल में ही ईड़ गांव के सिपाही नेगी भवानी सिंह के साथ कर दी गई थी.

इसी उम्र में गुरु शिबू पोखरियाल ने तीलू को घुड़सवारी और तलवारबाजी के सारे गुर सिखा दिए। 15 से 22 मार्च के मध्य इन्होंने 7 युद्ध लड़े, जो संभवत विश्व में किसी वीरांगना ने नहीं लड़े होंगे. 22 वर्ष की आयु में नयार नदी में स्नान करते समय शत्रु के एक सैनिक रामू रजवार ने धोखे से तीलू पर तलवार का वार कर दिया।

खेल स्टेडियम का नाम तीलू रौतेली रखने की उठ रही मांग

कल सोशल मीडिया पर उत्तराखण्ड के युवाओं द्वारा किये गए तीलू रौतेली की जन्म जयंती को ले कर ट्वीट दिखाता है, कि यहां के युवा अपने ऐतिहासिक महापुरुषों को कितना अधिक सम्मान देते है। उत्तराखंड की लक्ष्मीबाई कही जाने वाली वीरांगना तीलू रौतेली की जंयती पर उत्तराखंड के युवाओं द्वारा खेल स्टेडियम हल्द्वानी का नाम बदल कर तीलू रौतेली के नाम पर रखने की मांग उठ रही है.

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आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास और विभूतियों के बारे में पता

उत्तराखंड के युवाओं की यह मांग काफी जायज है क्योंकि इस तरह आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास और विभूतियों के बारे में पता चलेगा. हालांकि यह सुझाव केवल इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय खेल स्टेडियम को लेकर ही नहीं है. युवाओं के अनुसार राज्य में स्थित सभी स्मारक, पार्क स्टेडियम को उत्तराखंड के विभूतियों के नाम पर होना चाहिए. जिससे आने वाली पीढ़ियां कम से कम स्मारक देखकर या स्टेडियमों में नाम देखकर इनके बारे में सर्च करेगी, उनको पता तो चलेगा कि जिस देवभूमि में आज वो ठंडी हवाएं खा रहे है, वो हज़ारों कुर्बानियां देने के बाद मिल सकी है।

उत्तराखंड सरकार ने तीलू रौतेली के नाम पर महिलाओं के लिए तीलू रौतेली पेंशन योजना भी चला रखी है.