जिंदगी की तमाम मुश्किलें नहीं तोड़ पाई नूतन तन्नू पंत का हौसला, दूसरों के लिए बनी प्रेरणास्रोत

कहते हैं कि यदि सपने बड़े हो तो राह में मुश्किलें भी ज्यादा होंगी लेकिन यदि उन मुश्किलों के आगे आपका हौसला ना टूटे, तो आपको मंजिल तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता। ऐसी ही एक कहानी है पौड़ी गढ़वाल के चौबट्टाखाल के कुई गांव निवासी नूतन तन्नू पंत की, जिसकी जिंदगी की दुश्वारियों से जूझते होने के बावजूद हार नहीं मानी और आज उनके गांव की पहचान उनके नाम से होने लगी है।

 

जिंदगी में परेशानियों का दौर

पौड़ी गढ़वाल के चौबट्टाखाल से मात्र दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित कुई गांव निवासी नूतन तन्नू पंत की जीवन में कई उतार चढ़ाव आए। बचपन में पिता की मौत के बाद मां सहारा बनी लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था। इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद नूतन आगे की पढ़ाई के लिए देहरादून आए और यहां पढ़ाई के साथ साथ परिवार को सहारा देने के लिए नौकरी करने लगी। इसी दौरान मां बीमार पड़ी जिसे चिकित्सकों ने कैंसर बताया। जिसके बाद नूतन की मां को जौलीग्रांट अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन तमाम कोशिशों के बाद मां ओ नहीं बचा पाए। तमाम परेशानियों के बाद नूतन पंत ने गांव के खेतों में कुछ करना चाहती थी लेकिन इसी दौरान उसके जीवन में असफल विवाह का दौर भी आया।

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नूतन की परेशानियां यही खत्म नहीं हुई। अपनी मां के नाम से खेतों में नींबू व बड़ी इलायची का बाग लगाया लेकिन जानवरों तथा चोरों से बचाने में असफल रही। इतना ही नहीं कुछ लोग तो खेतों से पौधे ही उखाड़ कर लें गए। फिर भी नूतन आपने इरादों से नहीं डिगी और अपने घर में आस्टर मशरूम की खेती शुरू की जो सफल रही। बस यही से नूतन की सफलता का रास्ता खुल गया। जिसके बाद मुर्गियां खरीदकर पोल्ट्री फार्म शुरू किया और पिछले वर्ष ही मछली पालन का तालाब बनाकर मछली पालन का व्यवसाय शुरू कर दिया।

नूतन तन्नू पंत बनी प्रेरणास्रोत

नूतन का कहना है कि पहले लोग उसे गंभीरता से नहीं लेते थे पर जैसे-जैसे उसकी सफलता दिखने लगी लोग उसकी तारीफ करने लगे। जमीन पर काम को देखते हुए सरकारी विभाग भी आगे आए और हर स्तर पर सहयोग करने लगे। बैंक भी उन्हें वातानुकूलित मशरूम यूनिट लगाने के लिए ₹500000 का लोन देने के लिए तैयार हो गया जिसमें सरकार की ओर से कुछ अनुदान भी है। अब उसकी अपने इस छोटे से कैंपस में जैविक, सब्जियां व फल पैदा करने की योजना है ताकि उनके भविष्य के होम स्टे योजना में पर्यटकों को गांव का माहौल, शुद्ध हवा और जैविक भोजन मिल सके। वे गांव वालों को भी इसके लिए प्रेरित कर रही हैं। नूतन तन्नू पंत की मेहनत और कामयाबी से गांव की पहचान उसके नाम से होने लगी।