हरि महाराज का अलग है इतिहास

हरि महाराज मंदिर
फोटो साभार: आदर्श भट्ट

उत्तरकाशी. बाडागड्डी के करीब 14 गांवों के आराध्य देव श्री हरि महाराज का मंदिर कुरोली (मुस्टिकसौड) के हरि गिरि पर्वत पर स्थित है। यह शक्ति को समर्पित एक पवित्रतम पौराणिक हिंदू मंदिर है। माना जाता कि शिव के प्रथम पुत्र कार्तिकेय ही हरिमहाज का रुप है।

आइए जानते हैं हरि महाराज मंदिर का इतिहास

हरि गिरि पर्वत पर स्थित कुज्ब (कुंज्जनपुर) में घने जंगल के बीच हरि महाराज का मंदिर स्थित है जहां हरिभक्त अपने दुखों का निवारण व दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कुरोली गांव से दो किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़ने के बाद यहां पहुंचा जा सकता है। माना जाता है कि यह मंदिर हजारों वर्ष पूर्व है। हमारे सहयोगी उपेन्द्र पंवार बताते हैं कि यह मंदिर शाय़द तब बना होगा जब यहां लोग ने यहां बसना शुरू किया होगा।

फोटो साभार © आदर्श भट्ट

पौराणिक कथाओं (Mythology) में उल्लेख है कि जब भगवान कार्तिकेय व गणेश महाराज को शिव व पार्वती जी ने पूरी प्रथ्वी का चक्कर लगाने को कहा तो गणेश ने अपने माता पिता को पृथ्वी मानकर चक्कर लगाए। लेकिश जब शिव के प्रथम पुत्र कार्तिकेय (हरि महाराज) चक्कर लगाने के बाद लोटे तो गणेश जी को विजयी घोषित कर दिया गया था। जिससे कार्तिक अपने माता-पिता से रुठकर एकांत ही जंगलों की और चले गए।

नोट: इस आर्टिकल में यदि कोई गलती हो तो आप हमें contact.hindulive@gmail.com पर सुझाव दे सकते हैं।