संवेदनहीनता: परिवार ने खोया इकलौता बेटा तो सरकार ने दिया 5000 का मुआवजा

रुद्रप्रयाग जनपद के कांडा दैड़ा गांव में जब बच्चे की गौंडार गदेरे में पांव फिसलने से मौत हो गई थी। एक तरफ परिवार ने एकलौते कमाने वाले सदस्य को दिया तो सरकार द्वारा घावों पर मरहम लगाने के बजाय राहत के नाम पर मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से मुआवजा के तौर पर 5000 रुपए की धनराशि देकर मजाक बनाया। अब परिवार ने 5000 की धनराशि वापस भेजने की बात कही है।

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बता दें कि रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ विकासखंड के कांडा दैड़ा गांव निवासी संतोष सिंह की 19 मार्च को गौंडार गदेरे में पांव फिसलने से मौत हो गई थी। संतोष की मौत के बाद उनकी मां गौरा देवी तथा पत्नी सीता देवी बेसहारा हो गई। परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य को खोने के बाद परिवार को जहां मदद की जरुरत थी लेकिन सिस्टम और संवेदनहीन प्रशासन ने उन्हें मदद के तौर पर मुख्यमंत्री राहत कोष से 5000 मुआवजे की राहत राशि भेजी।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बुजुर्ग महिला गोरा देवी की पुत्री मंजू रावत ने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजा है जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री राहत कोष से भेजी गई 5000 की मुआवजा धनराशि को वापस भेजने की बात कही है। मंजू ने कहा कि मेरी मां गरीब और वृद्ध महिला है। बेटे की मौत के बाद वह बेहद असहाय हो गई है। ऐसे में सरकार द्वारा राहत के नाम पर ₹5000 की न्यूनतम राशि भेज कर उनका मजाक उड़ाया गया है। सरकार द्वारा घावों पर मरहम लगाने की बजाय उलाहना देने का काम किया है। इस राशि को स्वीकार कर हम अपने स्वाभिमान को ठेस नहीं पहुंचाना चाहते है। उन्होंने ज्ञापन के साथ ही मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष की राशि भी लौटा दी है।