छात्रों को मुफ्त टैबलेट योजना को लेकर अनियमितता सामने आ रही है। टैबलेट के लिए धनराशि छात्रों को देने की बजाय कुछ जिलों ने खंड शिक्षा अधिकारी व प्रधानाचार्य के खातों में जमा कर दी। मामला सामने आने पर पर विभागीय अधिकारी जांच कराने की बात कह रहे हैं।

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कोरोना महामारी के बीच शिक्षा का स्वरूप ही बदल गया। पढ़ाई को सुचारू रखने के लिए सरकार ने ऑनलाइन पढ़ाई को शुरू किया। दूरदर्शन, रेडियों के जरिए भी छात्रों को ऑनलाइन क्लासरूम से जोड़ा, लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह थी कि आनलाइन पढ़ाई के लिए कई छात्रों के पास जरुरी संसाधनों का अभाव था, जिसको देखते हुए सीएम धामी ने युवाओं को बड़ी सौगात दी थी। जिससे प्रदेश के करीब एक लाख 69 हजार छात्राओं को सरकार की इस योजना का सीधा लाभ मिलेने की बात कही थी। एक जनवरी को सीएम धामी उत्तराखंड बोर्ड के छात्र- छात्राओं को मुफ्त टैबलेट योजना की शुरुआत की थी। जिसके तहत डीबीटी के जरिए छात्र-छात्राओं को 12-12 हजार रुपये मिलने जा रहे हैं, लेकिन अब इस योजना में अनियमितताएं उजागर हो रही है।

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राज्य के कुछ जनपदों में छात्रों के खातों में धनराशि भेजने की बजाय प्रधानाचार्य और खंड शिक्षा अधिकारियों के खातों में भेजी गई है। जिसमें उत्तरकाशी में प्रधानाचार्यो तथा रुद्रप्रयाग में खंड शिक्षा अधिकारी भी शामिल हैं, वहीं अन्य जिलों की भी यही हाल है। इस मामले में शिक्षा सचिव आर मिनाक्षी सुंदरम ने इस मामले में जांच कराने की बात कही है।