अयोध्या: राम मंदिर निर्माण में लगने वाले पिंक पत्थर की खदान पर राजस्थान कांग्रेस सरकार ने लगाई रोक

अयोध्या. अयोध्या की कार्यशाला में राजस्थान से आए बंसी पहाड़पुर के पिंक स्टोन पत्थरों को तराश कर राम मंदिर निर्माण के योग्य बनाया गया है।

राम मंदिर के लिए लगभग तीन लाख घनफुट पत्थरों की जरूरत

राम मंदिर के लिए लगभग तीन लाख घनफुट पत्थरों की जरूरत है, जिसमें से एक लाख घनफुट पत्थरों को तराशा जा चुका है और 20 हजार घनफुट के करीब पत्थर रामसेवक पुरम में रखे हुए हैं लेकिन अब राजस्थान की कांग्रेस सरकार इस खदान पर रोक लगा दी है।

राम मंदिर निर्माण में लगने वाले पिंक पत्थर की खदान पर राजस्थान कांग्रेस सरकार ने लगाई रोक


बचे पत्थरों को बंसी पहाड़पुर की खदान से अयोध्या मंगाया जाना है, लेकिन खदान पर रोक के कारण निर्माण कार्य प्रभावित होने की बात सामने आ रही है l हालांकि, इस मुद्दे पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने बयान देते हुए कहा कि वक्त आने पर वह कुछ बोलेंगे।

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खदान पर रोक के पीछे का तर्क


जिला कलेक्टर नाथमल दीदेल ने कहा कि बंशी पहाड़पुर में हो रहे अवैध खनन की जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई की गई। प्रशासन ने खनन को अवैध घोषित कर दिया है क्योंकि इस उद्देश्य के लिए आधिकारिक रूप से कोई पट्टा आवंटित नहीं किया गया था। अवैध खनन को रोकने के लिए संभागीय आयुक्त प्रेमचंद बेरवाल द्वारा जारी एक हालिया निर्देश के अनुसार कार्रवाई की गई है।


प्रशासन ने इन गुलाबी पत्थरों से लदे लगभग ढाई दर्जन ट्रकों को जब्त कर लिया। हालांकि ये जानकारी नहीं है कि ये ट्रक पत्थर कहां ले जा रहे थे। खनन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
राजस्थान के भरतपुर जिले में बंशी पहाड़पुर की खदानों से निकाले गए पत्थरों के खनन पर प्रतिबंध से अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में कुछ अड़चनें आ सकती हैं।


कार्यशाला के मैनेजर ने कहा कि नहीं होगी कोई कमी


कार्यशाला के मैनेजर अन्नू भाई सोमपुरा का कहना है कि राम मंदिर निर्माण के लिए 1990 में कार्यशाला स्थापित की गई थु उसी समय से बंसी पहाड़पुर राजस्थान से पत्थरों को मंगाया जा रहा थी।

अभी वर्तमान में कार्यशाला बंद चल रही है, क्योंकि तकरीबन एक लाख घनफुट पत्थरों को तराश कर राम मंदिर के योग्य बनाया जा चुका है और जो पत्थर राजस्थान से आने हैं, उनको मंगाया जाएगा। लेकिन पहले इन तराशे गए पत्थरों को राम जन्मभूमि परिसर में पहुंचा दिया जाएl

हालांकि अब जब कार्यशाला शुरू होगी तो वह राम जन्मभूमि परिसर में ही शुरू होगी। अनु भाई सोमपुरा का कहना है की पत्थरों की कोई कमी नहीं है। अभी भी राजस्थान से उनके पास फोन आ रहे हैं कि पिंक स्टोन पत्थर तैयार हैं, उनको कब भेजा जाए।