अल्मोड़ा के 2 युवाओं ने शुरू किया स्वरोजगार, नहीं मिल रहा मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से कोई लाभ

अल्मोडा़– एक कहावत है कि यदि आप के हौसले बुलंद है तो आप के कार्य को शिखर पर पहुंचाने से कोई नहीं रोक सकता. ऐसे ही एक कहानी है उत्तराखंड के अल्मोड़ा के 2 युवाओं की जिसने लॉकडाउन में अपनी पूरी मेहनत लगाकर अच्छा व्यवसाय का जरिया बनाने मे कार्य कर रहे है.

जानिए अल्मोड़ा के 2 युवाओं के बारे में

अल्मोड़ा जिले के बजेल गांव के रहने वाले तेजेन्द्र बजेली और उनका भाई नरेंद्र बजेली प्राइवेट सेक्टर में काम करते थे, देश में लोक डाउन होने के समय दोनों भाई वापस अपने गांव लौट आए. लॉकडाउन के दौरान ही उन्होंने घर पर रहकर ही अपने कृषि कार्य को स्वरोजगार की तरह अपनाने की सोची.

दोनों भाइयों द्वारा इस मामले में काफी जानकारी जुटाई गई कि किस तरह से क्या काम ऐसा किया जाए, जिससे स्वयं के साथ दूसरों को भी रोजगार मिले. फिर दोनों भाइयों ने मिलकर आर्गेनिक (हल्दी) की फसल करने का मन बनाया, हल्दी की फसल इस लिए चुनी क्योकि कोरोना बिमारी के चलते यही एक बेस्ट आप्शन हैं, क्योंकि यह इमिन्युटी सिस्टम को स्ट्रोंग रखता हैं, और ये मार्किट मे सेल भी हो सकता है.

बंजर खेतों को दोबारा हरा-भरा करने की ठानी

तेजेन्द्र बजेली और उनके भाई के लिए प्रथम समस्या यह थी कि उपयुक्त किए जाने वाले खेत पिछले 5 सालों से बंजर थे. और खेतों में काफी झाड़ियां उत्पन्न हो गई थी. दोनों भाई ने मिलकर खेतों की सफाई करनी शुरू कर दी. 10-12 दिनों में दोनों भाइयों ने मिलकर खेत की सफाई कर दी और खुदाई करने के लिए गांव से 3 लोग बुलाकर 15 दिन में सफाई से लेकर बीज की बुवाई कर दी थी.

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना पोर्टल से नहीं मिली कोई जानकारी

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा बार-बार स्वरोजगार को लेकर बोला गया, परंतु उस योजना का जमीनी स्तर पर लाभ नहीं मिल रहा. दोनों भाइयों द्वारा इस कार्य के लिए 3-4 प्लान बनाए गए जिससे कि स्थानीय लोगों की भी मदद हो सके और उन्हें भी रोजगार मिल सके, इसमें जो मुख्य समस्या थी आर्थिक समस्या, जिसके लिए इनको लोन लेने की जरूरत पड़ी.

इस दौरान यह लोग युवा कल्याण उद्यान विभाग और बैंक गए, तो कहीं से भी इन्हें किसी प्रकार की जानकारी नहीं मिली. साथ में विभागों द्वारा यह कहा गया कि सरकार की ओर से अभी तक गाइड लाइन नहीं आई है. इनके द्वारा मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के पोर्टल मे भी रजिस्टर किया और वहा से भी कोई जानकारी नही मिली.

कही से कुछ मद्द ना मिलने की वजह से उनके भाई नरेन्द्र का मनोबल टूट गया और वह वापस दिल्ली चले गए.

खेत की सुरक्षा के लिए किये गये उपाय

तेजेन्द्र बजेली ने हिन्दू लाइव टीम को बताया कि खेतों को जंगली जानवरों से बचाने की सुरक्षा के लिए घेराबंदी करनी शुरू की है, जिसमेंं उन्होंने बेकार पड़ी बिजली की तारों से अपने पूरे खेत की घेराबंदी कर दी. जिससेे घेराबंदी करने इनके धन की बचत हो गई है.

दूसरे स्वरोजगार पर भी कर रहे फोकस

तेजेन्द्र बजेली ने बताया कि आजकल वह कंडाली और सिल्वर (कुमाऊनी भाषा) को एकत्रित कर रहे हैं. कंडाली का उपयोग चाय और उमरेड सिस्टम को स्ट्रांग बनाने तथा सिल्वर का उपयोग पेट में पथरी के इलाज के लिए किया जाता है. इन चीजों के लिए बाजार कैसे उपलब्ध कराया जाए, उसके लिए यह लोग उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट से जानकारी ले रहे हैं

काडांली और सिल्वर

उत्तराखंड सरकार जहां एक तरफ स्वरोजगार की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित करना जा रही है वही स्वरोजगार के इच्छुक युवाओं की सहायता ना होना वाकई निंदनीय है उत्तराखंड सरकार यदि ऐसे मामलों में सहायता प्रदान करवाएगी, तभी युवा स्वरोजगार की तरफ बढ़ सकेंगे.