अल्मोडा़: डभरा सौराल गांव में सड़क का अभाव, ग्रामीणों की चेतावनी सड़क नहीं तो वोट नहीं

0

अल्मोड़ा. सल्ट में स्थित डभरा सौराल 21वीं सदी में भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। 1200 की आबादी वाले इस क्षेेेत्र में सड़क के आभाव में 300 से ज्यादा लोग पलायन कर चुके हैं। ग्रामीणों ने बताया कि सल्ट विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुरेंद्र सिंह जीना ने आश्वासन दिया था कि गांव को सड़क से जोड़ा जाएगा लेकिन यह आश्वासन सिर्फ अपने वोट बैंक को बढ़ाने की चाहत में दिया गया था।

राज्य बनने के 20 साल बाद भी डभरा सौराल गांव में सड़क का अभाव

उत्तराखंड एक अलग राज्य बने हुए 20 साल हो गये है, फिर भी राज्य के कई क्षेत्रों में संचार सुविधा, सड़क सुविधा तथा स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। ऐसे ही एक कहानी है अल्मोडा़ जिले के डभरा सौराल गांव की जहां उत्तराखंड बनने के इतने वर्षों बाद भी सड़क संपर्क मार्ग से वंचित है। ग्रामीणों का सब्र अब टूटने लगा है ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि गांव में सड़क नहीं आएगी तो वह चुनाव का बहिष्कार करेंगे।

यह भी पढ़े- उत्तरकाशी: गंगाड गांव की दो लड़कियां 3 दिनों से लापता, लकड़ी बीनने गई थी जंगल

जनपद अल्मोडा़ के डभरा सौराल गांव के लोग आजादी के इतने वर्षों के बाद सड़क का अभाव है। 1200 जनसंख्या वाले इस गांव में सड़क अब लड़कों की शादी में बाधा बन रही है। सड़क न होने की वजह से इस गांव में कोई अपनी लड़की की शादी इस गांव में देने के लिए तैयार नहीं है।

डभरा सौराल निवासी हीरा सिंह नेगी ने बताया कि सड़क और मूलभूत सुविधा ना होने से इस गांव में पलायन का बहुत प्रभाव पडा़ है। गांव में अभी तक लगभग 260-300 से अधिक लोग पलायन कर चुके हैं।

डभरा सौराल गांव में सड़क का अभाव, ग्रामीणों की चेतावनी सड़क नहीं तो वोट नहीं

सड़क मांग को लेकर ग्रामीणवासी काफी समय स्थानीय प्रतिनिधियों तथा विधायक से मिले, लेकिन इस मामलें में आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। सोशल मीडिया के माध्यम से हीरा सिंह नेगी ने इस मामले को लेकर काफी नेताओं को इस समस्या की जानकारी दी, परन्तु वहां भी ढाँक के तीन पात वाली बात हुई।

खुद ही सड़क बनाने को जुटे थे ग्रामीण

डभरा सौराल गांव में सड़क का अभाव
खुद ही सड़क खोदते ग्रामीण

ग्रामीणों ने बताया कि जब प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली तो उन्होंने खुद ही सड़क बनाने की सोची। तीन किलोमीटर लम्बी सड़क खोदने के बाद भी जन प्रतिनिधियों की आंखें नहीं खुली।