चमोली: 350 की आबादी वाले ठेली गांव को नहीं अभी तक मिला राजस्व गांव का दर्जा

350 की आबादी वाले ठेली गांव को नहीं अभी तक मिला राजस्व गांव का दर्जा

चमोली. जनपद में स्थित ठेली निवासियों ने कई बार जिला प्रशासन से राजस्व गांव का दर्जा देने की गुहार लगाई. लेकिन प्रशासन ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया. ग्रामीणों का कहना है कि हम सरकार द्वारा जारी की गई योजनाओं से वंचित हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता कमला देवी रावत का कहना है कि यह एक दुखद विषय है जो आज भी ठेली गांव की पहचान राजस्व ग्राम के रूप में नहीं है. ग्राम ठेली को राजस्व का दर्जा न मिलने से विकास कार्यों से ग्रामीण कई वर्षों से उपेक्षित है.

इस गांव में 46 से ज्यादा परिवार एवं 350 जनसंख्या की घनी आबादी है. कमला देवी रावत ने बताया कि ठेली ग्रामसभा पलेठी का मूल गांव था और आज भी है.

ग्रामीणों ने की राजस्व गांव मांग

इसी के साथ सन 2008 में जब ग्राम पंचायत पलेठी से नई ग्राम पंचायत मैड,नेथोली का पुनर्गठन हुआ लेकिन ग्राम ठेली अभी भी ग्राम पंचायत पलेठी से ही पहचान बनी हुई है. कई बार हमारे गांव वालों ने राजस्व गांव बनाए जाने के लिए ग्राम पलेठी से अनापत्ति प्रमाण पत्र की मांग की अफसोस जो कि अभी तक हमें प्राप्त नहीं हुआ.

विगत वर्षों में ग्रामीणों द्वारा जिलाधिकारी से कई बार यह मांग उठाई गई. लेकिन प्रशासन ने इस और ध्यान नहीं दिया. ग्रामीणों का कहना है कि हम एक बार और माननीय जिलाधिकारी से राजस्व गांव के लिए प्रार्थना करते हैं.

यदि इस बार भी प्रशासन निराश करता है तो समस्त गांव वासियों के पास आंदोलन के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचता है. ।

ठेली गांव है कई सरकारी योजनाओं से वंचित

कमला देवी ने बताया कि कैसे गांव के लोग आज भी आंगनबाड़ी, प्रधानमंत्री आवास, एनम सेंटर,आवागमन के लिए मार्ग,शिक्षा,स्वास्थ्य,पानी,सड़क,सीसी मार्ग, पुलिया,नहरें, स्कूल भवन, बारात घर व सामुदायिक केंद्रआदि ग्राम पंचायत में केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं से वंचित हैं.

चाहे आशा कार्यकर्ता हो या आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, वन पंचायत जिम्मेदारी हो या ग्रीनडीलर हो या महिला मंगल दल की योजना जिससे ग्राम ठेली के सभी लोग आज भी अपने आप को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं.