खटीमा गोलीकांड में शहीद राज्य आंदोलनकारियों को मुख्यमंत्री ने अर्पित की श्रद्धांजलि

उत्तराखंड. 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आया था। उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर कई आंदोलनकारी शहीद हो गए। इसी आंदोलन में 1 सितंबर 1994 को खटीमा गोलीकांड की 26वीं बरसी पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शहीद आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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उत्तराखंड मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने खटीमा गोलीकांड में शहीद राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, कि उत्तराखंड सरकार शहीद आंदोलनकारियों के बलिदान का सम्मान और उनके सपनों के अनुरूप समृद्ध और प्रगतिशील उत्तराखंड बनाने के लिए संकल्पबद्ध है।

खटीमा गोलीकांड में शहीद राज्य आंदोलनकारियों को  उत्तराखंड मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत  ने की अर्पित श्रद्धांजलि
image source- uttarakhand CM Trivendra singh Rawat tl

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1 सितंबर 1994 खटीमा गोलीकांड

1994 में उत्तराखंड राज्य की मांग धीरे-धीरे जोर पकड़ने लग गई थी। आंदोलनकारियों द्वारा जगह-जगह पर जुलूस और शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जा रहा था। 1 सितंबर 1994 को अलग राज्य की मांग को लेकर खटीमा में हजारों की संख्या में लोग एकत्रित हो गए थे। इस आंदोलन में बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और पूर्व सैनिक शामिल थे।

शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद पुलिस ने बर्बरता से आंदोलनकारियों पर गोली चलाई थी। जिसमें कई लोग घायल और 7 लोग शहीद हो गए थे। इसके बाद से ही उत्तराखंड राज्य आंदोलन की रफ्तार और बढ़ गई थी।

गोलीकांड में शहीद हुए लोगों के नाम

कंजाबाग तिराहे से लौटते समय आंदोलन कार्यों पर पुलिसकर्मियों ने पहले पथराव तथा पानी की बौछारें करते हुए रबड़ की गोलियां चला दी। आंदोलनकारियों ने सभी से संयम बरतने की अपील करते रहे, परंतु पुलिस द्वारा बिना चेतावनी दिए अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी गई, जिसमें 8 आंदोलनकारी शहीद हो गए।

  1. प्रताप सिंह मनोला
  2. धर्मानंद भट्ट
  3. सलीम अहमद
  4. भगवान सिंह सिरौला
  5. गोपीचंद
  6. रामपाल
  7. परमजीत सिंह
  8. भुवन सिंह

1 सितंबर 1994 का दिन उत्तराखंड में काला दिवस के रूप में याद किया जाता है। पुलिस द्वारा चली गोलाबारी में सैकड़ों लोग घायल हो गए। उत्तराखंड आंदोलन में शहीद हुए लोगों की याद में हर वर्ष खटीमा स्थित शहीद पार्क में शहीद दिवस मनाया जाता है। खटीमा गोलीकांड के 6 साल बाद आंदोलनकारियों का सपना पूरा होगा और 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड एक अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।