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हिन्दू लाइव डेस्क :-

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा बजट सत्र के दौरान गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनानेे की घोषणा की थी. जिसे आज राज्यपाल श्रीमती बेबीरानी मौर्य ने भराड़ीसैंण (गैरसैण) को उत्तराखंड की ग्रीष्मक़ालीन राजधानी घोषित करनेकी स्वीकृति प्रदान की है।

बीजेपी ने अपने चुनाव संकल्प पत्र में यह घोषणा की थी कि उनकी सरकार आने पर गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया जाएगा. उत्तराखंड में बीजेपी की सरकार बनने के बाद उत्तराखंड वासी इसी मुद्दे का इंतजार कर रहे थे.

उत्तराखंड में भाजपा के 3 साल का कार्यकाल पूरे होने पर प्रदेश सरकार ने यह फैसला लिया, जिस पर आज राज्यपाल श्रीमती बेबी रानी मौर्य ने स्वीकृति प्रदान कर दी है.

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उत्तराखंड आंदोलन के समय से ही गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने का मुद्दा था, परंतु उत्तराखंड बनने के समय देहरादून को अस्थाई राजधानी बनाया गया।. जिसके बाद उत्तराखंड में सरकार आती जाती रही, परंतु इस मामले पर किसी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया.

उत्तराखंड देश का पांचवा राज्य बन गया है जिसके पास दो- दो राजधानियां है.

उत्तराखंड क्रांति दल द्वारा गैरसैण को स्थाई राजधानी बनाने की मांग समय-समय पर उठती रहती है, और इसके लिए समय-समय पर आंदोलन होता रहता है.

हालांकि गैरसैंण में उत्तराखंड सरकार के लिए बहुत सारी जिम्मेदारियां है. गैरसैंण में शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए एक नया इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना होग. तथा गैरसैण को भी राजधानी की तरह विकसित करना होगा.

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अब यह देखना होगा कि सरकार यह जिम्मेदारी कैसे निभाती है, क्योंकि ग्रीष्मकालीन सत्र चलाने के लिए देहरादून से समूचा सचिवालय गैरसैण पहुंचाना पड़ेगा जिससे कि देहरादून की जगह गैरसेण से शासन चलाया जा सके.

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अभी कुछ समय पहले ही उत्तराखंड के नेताओं के द्वारा यह बयान दिया गया था, कि गैरसैंण में चुने हुए नेताओं को ठंड लगती है. जिसकी वजह से वहां सत्र चलाना मुश्किल है, ऐसे हालातों में उत्तराखंड सरकार की जिम्मेदारियां बहुत बढ़ जाती है.