चमोली जनपद में 7 फरवरी को रेंणी गांव में आई भीषण आपदा से काफी जनमाल का नुकसान हुआ। अभी तक भी इस आपदा का रेस्क्यू अभियान चल रहा है। इस आपदा में कई घरों के चिराग बुझ गए, और कई लोगों का आशियाना। आपदा में कई घर क्षतिग्रस्त हो गए,जिस से प्रभावित लोगों को रहने की समस्या उत्पन्न हो गई थी। ऐसे में एक बुजुर्ग महिला और उसकी बेटी के लिए देवदूत बनकर आए इंस्पेक्टर हरक सिंह राणा । 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला और उसकी बेटी का जब तक घर नहीं बन जाता तब तक वह इस्पेक्टर के घर पर ही रहेंगी।

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7 फरवरी की भीषण आपदा के बाद अभी भी लापता लोगों का सर्च अभियान जारी है, वहीं इस आपदा से गांव के कई घरों को तहस-नहस हो गए हैं। जिससे आपदा प्रभावित लोगों के रहने की समस्या उत्पन्न हो गई। रेणीं गांव की 85 वर्षीय सोणा देवी का भवन भी इस आपदा का जद में आ गया, जिससे उनका मकान पूरा क्षतिग्रस्त हो गया। मकान क्षतिग्रस्त होने से बुजुर्ग महिला और उसकी पुत्री के सामने अब रहने की समस्या उत्पन्न हो गई।

बुजुर्ग महिला की मदद के लिए आगे आए इंस्पेक्टर हरक सिंह राणा

इन परिस्थितियों में एसडीआरएफ उत्तराखंड पुलिस के इंस्पेक्टर हरक सिंह राणा उनकी मदद को आगे आए और अपना तीन कमरों वाला भवन महिला को रहने के लिए दे दिया। इंस्पेक्टर हरक सिंह राणा पिछले 7 सालों से एसडीआरएफ में नियुक्त है और अपने सौम्य स्वभाव के साथ ईमानदार ऑफिसर के रूप में जाने जाते हैं। वर्तमान समय में उनका परिवार जॉली ग्रांट में रहता है और इस आपदा के बाद वह अब तक आपदा प्रभावित क्षेत्रों में रेस्क्यू अभियान में लगे हुए हैं।

image- Uttarakhand police tl

इंस्पेक्टर हरक सिंह राणा के इस कार्य की सराहना हो रही है, यहां तक कि एसडीआरएफ सेनानायक नवनीत सिंह भुल्लर ने भी हरक सिंह के इस निर्णय की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार के मानवीय कार्यों से पुलिस और समाज के आपसी संबंधों में प्रगाढ़ता आते हैं और आपसे विश्वास की भावना को बल मिलता है।