उत्तराखंड अलग राज्य बनने के बाद भी पहाड़ी क्षेत्रों की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया, भले ही यहां की सरकार विकास और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लाखों दावे करती हो, परन्तु जमीनी हकीकत कुछ और ही है। पहाड़ी इलाकों में ना तो बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और ना ही सड़क पहुंच पाती है। ऐसा ही एक मामला चमोली जनपद के दशोली विकाखंड में सामने आया है, जहां एक महिला का स्वास्थ्य बिगड़ने पर ग्रामीणों के सहारे महिला को डंडी-कंडी के सहारे 8 किमी की दूरी तय कर सड़क तक लाना पड़ा। तत्पश्चात वाहन के जरिए जिला चिकित्सालय पहुंचाया जा सका।

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मामला चमोली जनपद के दशोली विकाखंड के ईराणी गांव का है, जहां शुक्रवार की रात को भवानी देवी की तबीयत बिगड़ गई, परंतु किसी तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं ना होने की वजह से भवानी देवी रात भर दर्द से कराती रही। शनिवार सुबह गांव के युवाओं ने मिलकर डंडी-कंडी के सहारे 8 किमी पैदल दूरी तय कर किसी तरह सड़क तक पहुंचाया। जिसके बाद वाहन के जरिए जिला चिकित्सालय पहुंचाया जा सका।

डंडी-कंडी के सहारे 8 किमी पैदल दूरी तय कर पहुंची बीमार महिला

उत्तराखंड में सत्तासीन सरकार हमेशा अपने विकास कार्यों को लेकर लाखों दावे करते हैं, परंतु उन दावों और जमीनी हकीकत में जमीन आसमान का फर्क होता है। जहां भारत अन्तरिक्ष में जाने की तैयारी कर रहा, वहीं उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में विकास कहीं खो सा गया है। ऐसा नहीं है कि इस प्रकार की यह पहली घटना है। जिस राज्य के अधिकांश युवा देश सेवा में लगे हैं, और उस क्षेत्र में ऐसी घटनाएं सामने आना वाकई शर्मनाक है, आखिर पहाड़ी लोगों का दर्द प्रदेश सरकार को कब दिखाई देगा।