उत्तराखंड पर्व पर अवकाश नहीं और दूसरे पर्वों पर अवकाश, वोट बैंक महत्वपूर्ण या संस्कृति,

हरेला पर्व को उत्तराखंड सरकार ने राजकीय अवकाश घोषित
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उत्तराखंड अपनी संस्कृति को बचाने और पहाड़ी क्षेत्रों के विकास के लिए एक अलग राज्य का निर्माण हुआ था, परंतु तुष्टीकरण की ऐसी नीति चली की उत्तराखंड पर्व पर अवकाश नहीं और दूसरे पर्वों पर अवकाश दिया जाता है। क्या वोट बैंक उत्तराखंड की संस्कृति से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

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आखिर उत्तराखंड पर्व पर अवकाश कब

उत्तराखंड में आज ईगास का त्यौहार मनाया जा रहा है। यह त्योहार दीपावली के 11 दिन बाद मनाया जाता है हर साल विभिन्न बुद्धिजीवी द्वारा इस त्यौहार के दिन राजकीय अवकाश की मांग होती रहती है, परंतु अभी तक किसी भी सरकार ने इस मांग को लेकर ज्यादा ध्यान नहीं दिया है।

अब सोचना यह है कि जब उत्तराखंड में छठ पूजा और कई त्योहारों पर राजकीय अवकाश मिल सकता है, तो फिर उत्तराखंड के पर्व ईगास पर क्यों नहीं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने तो उत्तराखंड में शुक्रवार को नमाज के लिए मुसलमानों को डेढ़ घंटे की खास छुट्टी देने की घोषणा की थी।

इन मामलों पर सरकार का ध्यानाकर्षित करने के लिए इस तरह के मुद्दों को सोशल मीडिया में भी उठाया जाता है, परंतु सभी सरकारें इस मामले में खाली औपचारिकताएं ही निभाती है। ऐसे में यह भी सोचनीय विषय है कि क्या सरकार के लिए वोट बैंक महत्वपूर्ण है।

उत्तराखंड पर्व पर अवकाश नहीं और दूसरे पर्वों पर अवकाश, वोट बैंक महत्वपूर्ण या

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उत्तराखंड पर्व ईगास आज उत्तराखंड में मनाया जा रहा है, जिसको लेकर सभी राजनीतिक पार्टियों द्वारा शुभकामनाएं संदेश दिए जा रहे हैं, परंतु इन 20 सालों में सभी राजनीतिक पार्टियों में तुष्टिकरण की ऐसी नीति चली, कि उत्तराखंड पर्व पराए और दूसरे त्यौहार अपने हो गए। क्या यही सबके लिए आंदोलनकारियों ने अपना बलिदान दिया था, या इन्हीं सबके लिए उत्तराखंड अलग राज्य बना था।


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