उत्तराखंड में महिलाओं की भूमिका पर सवाल, क्या सिर्फ ये बातें कहने के लिए हैं?

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हिंदू लाइव डेस्क :- आज के समय में महिला और युवाओं के विकास पर कई संस्थाएं काम कर रही है पर क्या वाकई यह संस्थाएं जमीनी स्तर पर काम करती हैं या फिर अखबार की तस्वीरों में और टीवी के न्यूज़ में सुर्खियां बटोरती हैं।

कल आरजे काव्या द्वारा यूट्यूब के हिल-मेल चैनल पर उत्तराखंड की महिलाओं और युवाओं की भूमिका पर बहस की थी। जिसमें से उत्तराखंड के 3 महिलाओं ने भाग लिया था, जिसमें नेहा जोशी जो सामाजिक कार्यकर्ता और भाजपा युवा मोर्चा की नेशनल मीडिया सह प्रमुख, आरुषि पोखरियाल निशंक जो अंतरराष्ट्रीय कथक नृत्यांगना, पर्यावरण एवं सामाजिक कार्यकर्ता और दीप्ति रावत भारद्वाज राज्ययमंत्री उपाध्यक्ष उच्च शिक्षा उन्नयन सलाहकार समिति ने भाग लिया था।

जिस पर इन्होंने उत्तराखंड के युवाओं और महिलाओं की भूमिका पर चर्चा की थी। परंतु क्या यह लोग वाकई इतने मददगार होतेे हैं या फिर इनकी मदद की भावना सिर्फ अखबारों और टेलीविजन के आगे तक सीमित होते हैं।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने दी जागरुकता की मिसाल – देखें वीडियो

सोशल मीडिया पर एक महिला का वीडियो वायरल हो रहा था जिसमें एक राजस्व अधिकारी एक महिला के साथ अभद्रता कर रहा था। उत्तराखंड के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने इस मामले पर इन तीनों को टैग करके संज्ञान में लेने की अपील की थी, परंतु इस मामले में नेहा जोशी को छोड़कर किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। नेहा जोशी ने इस मामले में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को इस मामले में संज्ञान लेने की अपील की।

दीप्ति रावत और आरुषि पोखरियाल निशंक ने इस मामले में की तरफ ध्यान भी नहीं दिया। तो फिर यह सवाल उठता है कि आखिर टेलीविजन के आगे ही महिलाओं और युवाओं की भूमिका पर बात होती है और जमीनी स्तर की हकीकत कुछ और ही है।

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