रोजगार के साथ स्थानीय कला को भी पहचान दिला रहे बागेश्वर का प्रमोद, शिक्षक दे रहे मार्गदर्शन

बागेश्वर. देश में लगातार बढ़ रही बेरोजगारी को देखते हुए केंद्र व राज्य सरकार ने युवाओं को स्वरोजगार अपनाने की सलाह दी है। इसी कड़ी में हम एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी प्रतिभा वाकई अद्भुत है। जो रोजगार के साथ स्थानीय कला को भी पहचान दिला रहे हैं।

इसे भी पढ़ें: स्यूंणी धारकोट ग्राम वासियों के लिए उत्पन्न हुआ खतरा, गांव के कई जगह पर पड़ी दरार

बागेश्वर जनपद में स्थित लमचुला गांव के निवासी प्रमोद कुमार चीड़ की छाल से सजावटी वस्तुओं को बनाने माहिर हैं। प्रमोद की इस प्रतिभा को सामने लाने में उनके शिक्षक हरीश दफोटी ने अहम भूमिका निभाई है।

File Photo

बता दें प्रमोद अपना घर चलाने के लिए मात्र 6 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन पर दिल्ली में नौकरी कर रहे थे। उनके शिक्षक ने घर आकर उन्हें अपनी इस कलाकारी को सामने लाने की सलाह दी। प्रमोद शिक्षक की बात मानकर जनवरी माह में अपनी नौकरी छोड़ घर आ गए।

देखें – चिन्यालीसौड़ में पेयजल समस्या का जल्द होगा समाधान, योजना को आगे बढ़ाने हेतु दिए निर्देश

जिसके बाद प्रमोद कुमार ने चीड़ के छाल से सजावटी सामान बनाना शुरू कर दिया। हिन्दू लाइव की टीम से बातचीत के दौरान प्रमोद ने बताया कि उन्होंने अपनी कलाकारी से केदारनाथ, बद्रीनाथ, बागनाथ मंदिर की मूर्तियां, घड़ी तथा वाल पेंटिंग्स भी बनाई हैं।

प्रमोद ने बताया कि मैं रोजगार के साथ इस स्थानीय कला को विश्व में एक पहचान दिलाना चाहता हूं, और इस कार्य में उनके शिक्षक प्रमोद उनका मार्गदर्शन कर रहे हैं।