धृतराष्ट्र उवाच

धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।                               मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ||१||


धृतराष्ट्र ने कहा – हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में युद्ध की इच्छा से एकत्र हुए मेरे तथा पांडु के पुत्रों ने क्या किया?

हिन्दी भावानुवाद –

स्वयं भगवान श्री कृष्ण द्वारा साक्षात उच्चारित होने के कारण यह पूर्ण आस्तिक विज्ञान है।

धर्मक्षेत्र शब्द सार्थक है, क्योंकि कुरुक्षेत्र के युद्ध स्थल में अर्जुन के पक्ष में श्रीभगवान् स्वयं उपस्थित थे। कौरवों का पिता धृतराष्ट्र अपने पुत्रों की विजय की संभावना के विषय में अत्यधिक संदिग्ध था। अतः इसी संदेह के कारण उसने अपने सचिव से पूछा, ”उन्होंने क्या किया?” वह आश्वस्त था कि उसकी पत्र तथा उसके छोटे भाई पांडु के पुत्र कुरुक्षेत्र की युद्ध भूमि में निर्णयात्मक संग्राम के लिए एकत्र हुए हैं। फिर भी उसकी जिज्ञासा सार्थक है। वह नहीं चाहता था कि भाइयों में कोई समझौता हो, अतः वह युद्ध भूमि में अपने पुत्रों की नियति (भाग्य, भावी) के विषय में आश्वस्त होना चाह रहा था। क्योंकि