उत्तरकाशी: भाई बहन ने शुरू किया ऐसा स्वरोजगार,अच्छी कमाई के साथ ही सबके लिए बनी मिसाल

घटती नौकरी और बढ़ती बेरोजगारी के बीच स्वरोजगार आय का एक विकल्प उभर कर आ रहा है। उत्तराखंड के युवा भी अपनी मेहनत और लगन से पहाड़ में रहकर अपना भविष्य संवारने में जुटे हैं। इसी कड़ी में एक और कहानी है उत्तरकाशी के भाई बहन की, जिन्होंने ना केवल स्वरोजगार को आय का साधन बनाया बल्कि आस-पास के गांवों की महिलाओं को इसका प्रशिक्षण भी दें रहे हैं।

उत्तरकाशी भाई बहन ने स्वरोजगार

उत्तरकाशी जनपद के चिन्यालीसौड़ से करीब 16 किमी दूर स्थित श्रीकोट गांव में करीब 200 परिवार रहते हैं और सभी का मुख्य व्यवसाय खेती तथा पशुपालन है। दीपेंद्र रावत गांव में ही रहकर कुछ करना चाहते थे। इसी दौरान उन्हें दीपेंद्र को मशरूम के बारे में पता चला कि इसका उत्पादन उनके गांव में हो सकता है। जिसके बाद दीपेंद्र ने देहरादून स्थित उत्तराखंड मशरूम प्रसार अधिकारी से संपर्क कर मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लिया। आठ साल पहले एक छोटे से कमरे में दीपेंद्र ने मात्र दस बैग से मशरुम उत्पादन की शुरुआत की और अब यह मिशन हजारों बैग के उत्पादन तक पहुंच गया है।

स्वयं करते मार्केटिंग

इस कार्य में उनकी बहन दीपिका कैंतुरा ने पूर्ण सहयोग दिया और दोनों भाई बहन स्वरोजगार के इस मिशन को कंधा से कंधा मिलाकर आगे बढ़ा रहे हैं। प्रतिवर्ष लाखों का मशरूम उत्पादन कर दोनों भाई बहन उसकी मार्केटिंग स्वयं कर रहे और आस-पास के गांवों की महिलाओं को भी प्रशिक्षण दे रहे जो अब मशरुम उत्पादन से जुड़ रही है। मशरूम का एक आउटलेट श्रीकोट गांव तथा दूसरा नजदीकी बाजार चिन्यालीसौड़ ( उत्तरकाशी) में खोल दिया है। प्रतिदिन मशरुम तोड़कर अपनी स्कूटी से चिन्यालीसौड़, डुंडा, ब्रह्मखाल और उत्तरकाशी तक बेच आते हैं, अब उनके सैकड़ों नियमित ग्राहक बन गये हैं।

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मशरूम बेचने के साथ-साथ मशरूम से अचार व ड्राई कर उसे देहरादून के मार्केट तक भेजते हैं। दीपिका कैंतुरा ने पांच- छः हजार प्रति किलो बिकने वाली सिटाके मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण ले लिया है जिसे अब वे अपने गांव में तैयार करेंगी। दोनों भाई बहन राज्य भर में होने वाली प्रदर्शनियों में अपने मशरुम का स्टाल लगाते हैं। दोनों भाई बहन अब मशरूम उत्पादन का अत्याधुनिक वातानुकूलित प्लांट व स्पान प्लांट लगाने की योजना बना रहे जिसके लिए सरकारी योजनाओं में 35 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था है साथ ही कृषि आधारित उद्योग होने के कारण बिजली के बिलों में भी भारी छूट का प्राविधान है।

लोगों को कर रहे जागरूक

दीपेंद्र और दीपिका के स्वरोजगार अभियान से पूरे क्षेत्र में मशरूम उत्पादन व उपयोग के प्रति लोग जागरूक हो रहे हैं। कृषि विभाग बागवानी विभाग की ओर से दोनों को रिसोर्स पर्सन के रूप में प्रशिक्षण देने के लिए बुलाए जाते हैं। वह मशरूम उत्पादन के लिए किसी भी प्रकार की सलाह तथा सहयोग के लिए हर वक्त तैयार रहते हैं। ‌‌