अल्मोड़ा के प्रदीप मेहरा की दौड़ का वीडियो वायरल
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उत्तराखंड और सेना इन दो शब्दों का आपस में इतना गहरा संबंध है कि जब भी एक शब्द के बारे में बात होती है तो दूसरा शब्द स्वयं ही ज़बान पर आ जाता है। एक छोटा सा प्रदेश जो अपनी प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है वही यहां के लोगों का सरल स्वभाव और ईमानदारी दूसरों से अलग करती है। मुश्किलों से भरी जिंदगी में भी यहां के लोगों लोगों के चेहरे पर एक शिकन तक नहीं आती। जिसका अंदाजा आप कल से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही अल्मोड़ा के प्रदीप मेहरा की दौड़ वीडियो को देखकर लगा सकते हैं। घर में मां बीमारी से जूझ रही और अपने सपने को साकार करने के लिए ड्यूटी के बाद देर रात नोएडा की सड़क पर बिना किसी की परवाह किए बगैर दौड़ता चला जा रहा था, क्योंकि उसे सेना में भर्ती होने का जुनून सवार है और यह कहानी केवल एक प्रदीप की नहीं, उत्तराखंड के तमाम युवाओं की है जो सेना में भर्ती होकर देश सेवा करना चाहते हैं।

दरअसल पत्रकार विनोद कापड़ी ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वह रात को कार से कहीं जा रहे थे। इसी दौरान जब उन्हें एक युवक नोएडा की सड़कों पर दौडता दिखा तो उन्होंने उसकी वजह जाननी चाही। युवक ने बताया कि उसका नाम प्रदीप मेहरा है और वह अल्मोड़ा का निवासी है। प्रदीप नोएडा सेक्टर 16 में मैकडोनाल्ड्स में काम करता है। प्रदीप ने बताया कि सेना में जाने के लिए वह ड्यूटी समाप्त होने के बाद रोज करीब 10 किमी दौड़ कर घर जाता है। जब कापड़ी ने उसे लिफ्ट देकर घर छोड़ने की बात कही तो प्रदीप ने मना कर दिया, क्योंकि इससे उसकी दौड़ का रुटीन बिगड़ जाएगा। प्रदीप ने बताया की उसकी मां बीमारी है और इलाज चल रहा है। वही घर जाने के बाद उसे खाना बनाना है क्योंकि भाई नाईट ड्यूटी पर गया हुआ है।

अल्मोड़ा के प्रदीप मेहरा की दौड़ का वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से वायरल हो गया। मसूरी के विधायक गणेश जोशी ने प्रदीप के मां का इलाज कराने की बात कही है। वही उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत समेत कई पत्रकारों तथा नेताओं ने यह वीडियो शेयर कर युवक के जज्बे को सलाम किया। सर्जिकल स्ट्राइक के हीरो कहे जाने वाले रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने भी वीडियो को शेयर करते हुए कुमाऊं रेजिमेंट के कर्नल, पूर्वी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राणा कलिता से प्रदीप के बारे में बात की है। जिससे प्रदीप का सपना पूरा हो सके। उत्तराखंड के मुश्किल भरे हालतों की यह कहानी केवल प्रदीप की ही नहीं है, यहां आपको गांव-गांव में सेना के प्रति इस तरह के जुनून रखने वाले कई युवक मिल जाएंगे। यदि प्रदीप उन लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया है जिन लोगों के पास तमाम सुविधाएं होते हुए भी बहाने बनाते रहते हैं।