उत्तराखंड

लापरवाही: अभी तक छात्रों को नहीं मिली मुफ्त किताबें, वेबसाइट से पढ़ाने के निर्देश

पढ़ेगा इंडिया तभी तो आगे बढ़ेगा इंडिया.. यह नारा इसलिए दिया जाता है कि भारत का कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित ना रहे और गरीब से गरीब परिवार का बच्चा भी विद्यालय जा सके। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। उत्तराखंड में भी छात्रों को मुफ्त किताबें दी जाती है लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते शिक्षा सत्र शुरू होने के 18 दिन बाद भी छात्रों को मुफ्त किताबें नहीं मिली। जिसके बाद शिक्षकों को एनसीईआरटी की वेबसाइट को देखकर पढ़ाने की सलाह दी गई है।

यह भी पढ़ें- Uttarakhand Weather: अगले 2 दिन इन जिलों में बारिश-ओलावृष्टि का अलर्ट 

बता दें कि उत्तराखंड के सरकारी तथा अशासकीय स्कूलों में कक्षा 1 से 12 तक के सभी छात्र छात्राओं को शिक्षा सत्र शुरू होने पर 1 अप्रैल से मुक्त किताबें मिलनी चाहिए थी लेकिन राज्य का हाल कुछ ऐसा है कि अभी तक छात्र छात्राओं को मुफ्त किताबें नहीं मिल पाई है। राज्य में करीब 11 लाख छात्र-छात्राओं को मुफ्त किताबें मिलनी है।

नियमानुसार हर साल शिक्षा सत्र 1 अप्रैल को शुरू होने से पहले सभी छात्र छात्राओं को मुफ्त पाठ्य पुस्तकें पहुंच जानी चाहिए, लेकिन उत्तराखंड में मुफ्त किताबों के नाम पर सरकारी और अशासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों छात्र छात्राओं के साथ मजाक किया जा रहा है। इस मामले में शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत का कहना है कि अगले साल से इस तरह की दिक्कत ना हो इसलिए हर स्कूल में बुक बैंक बनाए जाएंगे।

 

Editorial

This article was written by the Hindu Live editorial team.

Related Articles

Back to top button