उत्तराखंड में बेरोजगार युवाओं की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि उन्हें हर अधिकार के लिए सड़क पर उतरना पड़ता है। पहले भर्ती निकालने के लिए धरना, फिर परीक्षा कराने के लिए धरना, और अब रिजल्ट जारी करवाने के लिए भी धरना देना पड़ रहा है।